संदेश

October, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हमारे अनुरूप ही है त्योहार का यह दिखावा : पवन के वर्मा

चित्र
भारतीय विदेश सेवा के वरिष्ठ अधिकारी  पवन के वर्मा भारतीय मध्यवर्ग के विशेषज्ञ हैं. 'द ग्रेट इंडियन मिडिल क्लास' उनकी बहुचर्चित किताब है. पवन जी इन दिनों भूटान में भारत के राजदूत हैं. पवन जी का मानना है कि दीपावली को तड़क-भड़क का पर्व मध्य वर्ग ने बनाया है, बाज़ार ने तो बस इसमें सहयोग दिया है. आज 26 अक्टूबर 2011 को दीपावली के अवसर पर दैनिक हिंदुस्तान में पढ़िए पवन के वर्मा के साथ शशिकांत की बातचीत पर आधारित यह लेख. - शशिकांत 

हमारे अनुरूप ही है त्योहार का यह दिखावा
पवन के वर्मा
(लेखक भूटान में भारत के राजदूत हैं)
आज हमारे देश में दीपावली समृद्धि, सम्पन्नता और दिखावे का त्योहार बन गयी है। होली, दीपावली, दशहरा आदि पर्व-त्योहार प्राचीन काल से ही हमारे यहाँ बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाए जाते रहे हैं। चूंकि आज कुछ लोगों के पास ज्यादा पैसे आ गए हैं इसलिए इस तरह के धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सवों या कहें पर्व-त्योहारों में पैसे के साथ-साथ दिखावा ज्यादा होने लगा है। त्योहारों के अवसर पर कुछ लोगों में होड़ रहती है कि इस प्रदर्शन में कौन अव्वल रहता है। सन 1991 के बाद एक ख़…

असली दिखावे की समृद्धि : कुर्रतुल ऐन हैदर

चित्र
उर्दू की विख्यात लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर एक अमीर और अभिजात परिवार में पैदा हुई थीं, लेकिन उन्हें पैसे के दिखावे से वितृष्णा थी और ग़रीब लोगों के प्रति उनमें गहरी संवेदनशीलता थी. लगभग दस बरस पहले (मजहर कामरान के साथ साहित्य अकादेमी के लिए फ़िल्म बनाने के दौरान) हुई बातचीत में उन्होंने अमीरी के बदलते अर्थों पर बात की थी जो आज भी प्रासंगिक है. पेश है, बीते 23 अक्टूबर 2011 को दैनिक हिंदुस्तान में प्रकाशित लेख. - शशिकांत :
''आज की हमारी सोसायटी एक कंज्यूमरिस्ट सोसायटी है। हमलोग कंज्यूमरिज्म की ओर जा रहे हैं। बाजार जाकर देखिये कि कितनी दुकानें खुल गयी हैं और उनमें क्या-क्या बिक रहा है। किस-किस तरह के गुडस भरे पड़े हैं। पर्व-त्योहारों, सादियों, पार्टियों वगैरह में लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। आजकल के लोगों कों दौलत को प्रदर्शित करने में शर्म  नहीं आती। इसमें गरीब और लोअर मिडिल क्लास के लोग पिसते हैं और गलत रास्ते अख्तियार करते हैं।'' 'आग का दरिया', 'अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो' सरीखी कालजयी कृतियों की लेखिका कुर्रतुल ऐन हैदर उर्फ ऐनी आपा ने आज से…

gr8 indian techy boy...!

चित्र
This is gr8 indian techy boy...ye kal US par kabza kar sakta hai...ab chet jaao beta obama...!



शक्ति-पूजा और भारतीय स्त्री: उदय प्रकाश/अनामिका

चित्र
मित्रो, भारत में शक्ति-पूजा की परम्परा और भारतीय समाज में स्त्री की दशा के सन्दर्भ में उदय प्रकाश और अनामिका से बातचीत पर आधारित यह लेख पिछले साल दुर्गापूजा के अवसर परराष्ट्रीय सहारामें प्रकाशित हुआ था. आजकल नवरात्र चल रहा है इसलिए यह लेख प्रासंगिक है. पढ़ सकते हैं. शुक्रिया. - शशिकांत  

समाज की मुक्ति से जुड़ी है स्त्री की मुक्ति : उदय प्रकाश मेरा मानना है कि यथार्थ को झुठलाने के लिए सबसे ज्यादा धर्म और आध्यात्म का इस्तेमाल किया जाता है, मामला चाहे स्त्री का हो या दलित का या हाशिए पर की अन्य अस्मिताओं का। हमारे यहां कहा जाता है कि काशी का राजा डोम था। उत्तर प्रदेश में ही विंध्यवासिनी देवी की पूजा की जाती है।

दरअसल जब से स्त्री की सत्ता छीनी गई तब से उसकी पूजा की जाने लगी। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में आज भी कई जगहों पर मातृसत्तात्मक समाज है। लेकिन पूरे उत्तर भारत का समाज मातृसत्तात्मक है। 
यहां आज भी कन्या भ्रूण हत्या, दहेज और खाप पंचायतों द्वारा प्रेम करने पर स्त्रियों की जान ले ली जाती है। दूसरी तरफ हम देखते हैं कि यही समाज दूर्गा की भी पूजा करता है।


यथार्थ यह है कि स्त्रिय…