गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

विफल प्यार, पुरुषों से मिले अनुभव और विवाहेतर संबंध को 
खुलेपन से व्यक्त करनेवाली लेखिका 


ज 1 फरवरी है. गूगल ने आज अँग्रेजी व मलयालम भाषा की भारतीय लेखिका कमला दास पर डूडल बनाकर उन्हें याद किया है. 1 फरवरी 1973 को आज ही के दिन उनकी विवादस्पद और बहुचर्चित किताब पहली बार 'Ente Kadha' शीर्षक से मलयालम में प्रकाशित हुई थी. कमला दास को कमला सुरैय्या के नाम से भी जाना जाता है. हालांकि मलयालम भाषा में वो माधवी कुटटी के नाम से लिखती थीं। 

31 मार्च 1934 को केरल के त्रिचूर जिले के पुन्नायुर्कुलम में जन्मी कमला की बहुत ही कम उम्र में शादी हो गई थी। उस वक्त उनकी उम्र मात्र पंद्रह साल की थी। 15 साल की उम्र से ही वे कवितायें लिखने लगी थीं। उनकी माँ बालमणि अम्मा एक बहुत अच्छी कवयित्री थीं. कमला दास पर उनकी माँ के  लेखन का खासा प्रभाव पड़ा।

पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से परिवार के सो जाने के बाद वे रसोई में अपना लेखन जारी रखतीं और सुबह तक लिखती रहतीं। इससे उनकी सेहत ख़राब हो गई और वे बीमार रहने लगीं। अपने एक साक्षात्कार में कमला दास ने बताया, ''चूँकि मैं बीमार रहती थी, लिहाजा मुझे घर में आराम करने का ज्यादा वक्त मिलता था और इस तरह लिखने के लिए भी।'' 

एक ऐसे समय में जब किसी भी स्त्री के सामने अपने तौर-तरीके से ज़िंदगी जीने पर तमाम तरह की बंदिशें हों और घर, परिवार और समाज दकियानूसी मानसिकता से ग्रस्त हो और कई तरह की सामाजिक कुरीतियाँ जारी हों तब किसी भी लेखिका के लिए ख़ुद को अभिव्यक्त करना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे विपरीत हालात में कमला दास ने अपने आत्मकथात्मक लेखन को 'माय स्टोरी' नाम से संग्रहित किया। 

1 फरवरी 1973 को आज ही के दिन कमला दास की यह किताब पहली बार 'Ente Kadha' शीर्षक से मलयालम में प्रकाशित हुई थी. मात्र 107 पृष्ठ की इस किताब को पहली बार प्रकाशित करने का श्रेय 'करंट बुक्स' नामक प्रकाशन को है. सन 1977 में स्टर्लिंग पब्लिशर्स ने इसका अंग्रेज़ी अनुवाद 'माय स्टोरी' शीर्षक से प्रकाशित किया. सन 2009 में इसके अंग्रेज़ी संस्करण के प्रकाशन का अधिकार हार्पर कॉलिंस के पास है. 

'माय स्टोरी' में लेखिका ने अपने विवाहेतर संबंधों, प्यार पाने की अपनी नाकामयाब कोशिशों औऱ पुरुषों से मिले अनुभवों को खुलेपन से व्यक्त किया है। वे उस समय की शायद एकमात्र ऐसी लेखिका थीं जिसने बिंदास ढंग से अपने जीवनानुभवों को बड़े ही साहस से वर्णित किया और कई मसलों पर अपनी बेबाक राय ज़ाहिर कीं, जिन पर लिखने से कई कतराते थे। 

यह किताब इतनी विवादास्पद हुई और इतनी पढ़ी गई कि उसका पंद्रह विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ। इस किताब की बदौलत उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति मिली।

कमला की अंग्रेजी में ‘द सिरेंस’, ‘समर इन कलकत्ता’, ‘दि डिसेंडेंट्स’, ‘दि ओल्डी हाउस एंड अदर पोएम्स ’, ‘अल्फाेबेट्स ऑफ लस्ट’’, ‘दि अन्ना‘मलाई पोएम्सल’ और ‘पद्मावती द हारलॉट एंड अदर स्टोरीज’ आदि बारह किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। मलयालम में ‘पक्षीयिदू मानम’, ‘नरिचीरुकल पारक्कुम्बोल’, ‘पलायन’, ‘नेपायसम’, ‘चंदना मरंगलम’ और ‘थानुप्पू’ समेत उनकी पंद्रह किताबें हैं।
                                                                           
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सोमवार, 22 जनवरी 2018


किताब : कंप्यूटर और हिंदी भाषा (दिल्ली वि.वि. के C.B.C.S.  के अंतर्गत  बी.ए. हिंदी (ऑनर्स) द्वितीय वर्ष/बीए. प्रोग्राम, द्वितीय वर्ष, सेमेस्टर -  III/IV के विद्यार्थियों के लिए  हिंदी कौशल संवर्धक ऐच्छिक पाठ्यक्रम (HSEC)  की  किताब.) लेखक : डॉ शशि कुमार 'शशिकांत', मोतीलाल नेहरु कॉलेज, दिल्ली वि.वि., दिल्ली, भारत. 

मंगलवार, 30 अगस्त 2016

हिन्दी भाषा और साहित्य 'क' (दिल्ली वि.वि. के बी.ए. प्रोग्राम, प्रथम वर्ष के उन विद्यार्थियों के लिए जिन्होंने 12वीं तक हिन्दी पढी है.) लेखक : डॉ शशि कुमार 'शशिकांत' / डॉ. मो. शब्बीर, हिंदी विभाग, मोतीलाल नेहरु कॉलेज, दिल्ली वि.वि., दिल्ली, भारत.


हिन्दी भाषा और साहित्य 'ख' (दिल्ली वि.वि. के बी.ए. प्रोग्राम, प्रथम वर्ष के उन विद्यार्थियों के लिए जिन्होंने 10वीं तक हिन्दी पढी है.) लेखक : डॉ शशि कुमार 'शशिकांत' / डॉ मो. शब्बीर, हिंदी विभाग, मोतीलाल नेहरु कॉलेज, दिल्ली वि.वि., दिल्ली, भारत.


विफल प्यार, पुरुषों से मिले अनुभव और  विवाहेतर संबंध  को  खुलेपन से व्यक्त करनेवाली लेखिका  आ ज 1 फरवरी है. गूगल ने आज अँग्रेजी व म...