रविवार, 27 फ़रवरी 2011

एक पुस्तक प्रेमी पोर्न स्टार से लन्दन के पब में साक्षात्कार : फ्रेंक हुज़ूर

लन्दन के मशहूर 'हार्प' पब में वीक-एंड की एक रंगीन शाम
"आई एम अ पोर्न स्टार. मैं स्टोकहोम, स्वीडन की बाशिंदा हूँ. 15 साल की उम्र से ही पेरिस और लन्दन की गलियों में गुलज़ार हूँ. क्या आपने 'दि गर्ल हू प्लेड विद फ़ायर' नॉवेल  पढ़ा है? जो कहानी इस नॉवेल की हीरोइन लिसाबेथ (Lisbeth Salander) की है, वही अफ़साना मेरा हैं. ये अफ़साना स्वीडन के फ्लैश मार्केट में चाइल्ड र्ट्रैफिकिंग का एक बेहतरीन नमूना हैं. मैं भी उसी बाज़ार से होते-होते गुजिस्ता दस सालों में अब मुरझाने सी लगी हूँ.":मिशेल. 

लन्दन के मशहूर पब 'हार्प' में वीक-एंड की एक रंगीन शाम मिशेल के साथ अनायास हुई अपनी मुलाक़ात की फ़ीचर-रपट पेश कर रहे हैं फ्रेंक हुज़ूर अपनी 'लन्दन डायरी' में. - शशिकांत 



"अब के गर तू मिले तो हम तुझसे ऐसे लिपटें तेरी क़बा हो जाएँ" अहमद फ़राज़ की यह ग़ज़ल दिल-ओ-दिमाग़ पर रह-रह के हमला करती है, जब भी मेरी नज़र लन्दन के हर गलियों में गुलज़ार पब में मदहोश पब्लिक पर पड़ती हैं. यूँ तो शुक्रवार और शनिवार की हर वो शाम लन्दन के करीब 2000 पबों के लिए महफ़िल सा शमा लाती हैं, जहां वीकेंड की धूम भरी महफ़िल हर दिल को जवाँ कर देती हैं. क्या जवाँ दिल और क्या बुजुर्ग, सभी की मस्त निगाहों में मोहब्बत और खुलूश का नशा गुलज़ार हो उठता हैं. 

सेंट्रल लन्दन के चार्रिंग क्रॉस से थोड़ी ही दूर है लन्दन का मशहूर पब- 'हार्प.' पूरे ब्रिटेन के करीब ५२,000 पबों में इसे सबसे हरदिल अज़ीज़ पब का दर्ज़ा हासिल है.

मिशेल से मेरी मुलाक़ात 'हार्प' में उस वक़्त हुई जब उसने बड़े एहतराम से मुझसे बियर की एक पैग लेने की गुज़ारिश कर डाली. थोड़ी देर के लिए तो मेरे होश उड़ गए, मगर जल्दी ही मैंने खुद को संभाला और मिशेल की मुस्कान के नाम मैंने बार टेंडर को एक लार्ज गिनिस बियर के ग्लास के लिए इशारा कर दिया. 

पब के जोशीले माहौल में लडकियां यहाँ ऐसा खूब करती हैं. खासकर जब वो देखती हैं कि कोई लड़का बिना किसी गर्लफ्रेंड के ग़मज़दा सा चमन का दीदार का भूखा है तो 'कैन यू बाई मी अ ड्रिंक?' कहती हुई करीब आ जाती हैं. मिशेल ने भी मुझसे यही कहा. ज़्यादा उम्रदराज भी नहीं.सुर्ख होठों पर गज़ब सा नशा. बॉब कट बाल उसके कानों को जैसे सहला रहे हैं. सफ़ेद रंग के पुल्लोवर के ऊपर उसने काले कलर का ओवेरकोट पहन रखा है. हाईट कोई पांच फुट पांच इंच.

मेरी नज़र चेहरे पर से फिसलती हुई मिशेल की टांगों पर पड़ी. उसके गोरे जिस्म पर काले रंग का लिबास देख असद बदायूंनी का वो शेर याद आ गया- "ज़मीन से खला की तरफ़ जाउंगा, वहां से खुदा की तरफ़ जाउंगा. बुखारा-ओ-बग़दाद-ओ-बसरा के बाद, किसी कर्बला की तरफ़ जाउंगा. चमन से बुलावा बहोत है मगर मैं दस्त-ए-बला की तरफ़ जाउंगा."

मिशेल में मेरी दिलचस्पी धीरे-धीरे गहरी होने लगी. वक़्त का खज़ाना मेरे पास भी पूरा है और मिसेल भी खूब फ़ारिग है आज की शाम. हार्प पब चारो तरफ शराबियों के शोर से सराबोर. बैठने के लिए न बेंच पर  कोई किनारा दिख रहा है न कोई  स्टूल. खड़े-खड़े हम दोनों ने दीवार के सहारे फायरप्लेस पर अपने ग्लास को रेज़ किया और गुफ्तगू का आगाज़ हुआ. थोड़ी देर के लिए मुझे गफ़लत भी हुईं कि लन्दन की ये लड़की अपना बियर ख़त्म करते ही रफ़ू चक्कर हो लेगी और मुझे किसी और नाज़नीन के लिए ड्रिंक खरीदना न पड़ जाए.

बहरहाल, मैंने मिशेल से जानना चाहा कि उसका पेशा क्या हैं. जब तक मिशेल आगे कुछ कहती, उसने अपने कोट के अन्दर से एक नोवेल निकला. मेरी नज़र नावेल के टाईटल पर पड़ी जिस पर लाल रंग में खुदा हुआ था- 'दि गर्ल हू प्लेड विद फायर.' रायटर का नाम स्टिग लारस्सन.( Stieg Larsson) नॉवेल और उसकी टाइटल मेरी नज़रों में गड़ती जा रही थी, तभी मिशेल ने एक बम-सा गिराया मेरे कानों  के पर्दों पर- 'आई एम अ पोर्न स्टार.' 

जैसे ही ये लफ्ज़ मैंने सूना थोड़े वक़्त के लिए बस मेरी निगाहें मिसेल की आँखों में सैर करने लगी और ऐसा लगा जैसे उसकी आँखों में एक गहरी सुरंगनुमा खाई है और उसका कोई आखिरी मोड़ मुझे नज़र नहीं आ रहा हैं. सोहो (लन्दन का रेडलाइट एरिया) की सरपट गलियों के बहुत क़रीब होकर भी मैंने किसी सेक्स वर्कर से मिलने की उम्मीद ज़रूर लगाई थी, मगर किसी पोर्न स्टार से मेरी मुलाक़ात 'हार्प' पब में यूँ होगी, जिसके हाथों में एक नोवेल होगा, मैंने तसव्वुर भी नहीं किया था. ज़िन्दगी शायद ऐसे ही लम्हों का एक नोवेल हैं.

मिशेल ने 'पोर्न स्टार' लफ्ज़ का इजहार बेहद संजीदगी से किया और उसके चहरे पर किसी भी क़िस्म का शिकन मैंने नहीं देखा. बिल्कुल बिंदास और अपने होशो-हवाश में वो गुफ़्तगू कर रही थी. उसने गिनिस का एक सिप लेते हुए मुझसे पूछा कि मैं क्या करता हूँ. मैंने कहा, 'मैं शब्दों के साथ थोड़ी सी अवाराखानी करता हूँ. आजकल एक मशहूर प्लेबॉय, जो मज़हब का सहारा लेकर अपने मुल्क के लोगो को जन्नत का ख्वाब बेचता है, उसकी ज़िन्दगी का अफ़साना लिख कर कुछ और करने की कोशिश कर रहा हूँ.' 

यह सुनकर मिशेल की सुर्ख होठों पर मुस्कराहट फ़ैल गई. 'फोरगेट मी, मिशेल. आई वांट टू नो यू,' मैंने कहा. "मैं स्टोकहोम,स्वीडन की बाशिंदा हूँ. मगर 15 साल की उम्र से ही पेरिस और लन्दन की गलियों में गुलज़ार हूँ. क्या आपने इस नॉवेल को पढ़ा है?" पूछते हुए  मिशेल ने 'दि गर्ल हू प्लेड विद फायर' को मेरे आँखों के सामने हिलाया. मैंने लार्सान के इस नॉवेल के मुताल्लिक़ सुना भी नहीं था. मिशेल कहती है, "जो कहानी इस नोवेल के हेरोइन लिसाबेथ (Lisbeth Salander) की है, वही अफ़साना मेरा हैं. ये अफ़साना स्वीडन के फ्लैश मार्केट में चाइल्ड र्ट्रैफिकिंग का एक बेहतरीन नमूना हैं. मैं भी उसी बाज़ार से  होते-होते गुजिस्ता दस सालों में अब मुरझाने सी लगी हूँ."

मिशेल के बात करने का अंदाज़ मुझे मदहोश करने लगा था. मैं उसकीं अंग्रेजी के धीमे एक्सेंट को एन्जॉय कर रहा था जिसमें क्लियरिटी थी. वो आगे कहती है, "पोर्न इंडस्ट्री में जब एक कमसिन हसीना 15 साल की होती हैं तब उसका रुतबा मर्लिन मुनरो जैसा होता हैं. जब वो पचीस साल की हो जाती हैं तो उसे बेकार और बूढी समझा जाने लगता हैं. मैं भी पचीस साल की हूँ और अब मुझमे वो नशा नहीं पाया जाता, जब मैं लोलिता की तरह आई थी."
फ्रेंक हुज़ूर 'हार्प' पब में
'आखिर उसे यह सफ़र कितना मज़ेदार लगा?' मेरे इस सवाल ने मिशेल को जैसे पुराने दिनों की गलियों में धकेल सा दिया. थोड़े वक़्त के अंतराल के बाद वो थोड़ी मेरी तरफ झुकी और मेरी आँखों में घूरते हुए कहा, "जब मैं लोलिता वाली उम्र में थी, मुझे अपने बॉयफ्रेंड के साथ ओउटडोर सेक्स करना बेहद रोचक लगता था. हम वीकेंड पर कार लेकर सडकों पर खूब मस्ती करते. सुनसान सड़कों को देखते ही कपडे खोल कर फेंक देते और एक दूसरे में समां जाते...

'मेरे स्कूल के साथी आंद्रे के पापा पोर्न इंडस्ट्री के टॉप शॉट थे. एक दिन उन्होंने हम दोनों को गार्डेन में सेक्स करते देख लिया. फिर क्या था. उन्हें मेरा अंदाज़ इतना नशीला लगा कि उन्होंने मेरे लिए बहुत सारे लेंट चोकोलाते का बंडल ला दिया. लेंट चोकोलाते की खुशबू मेरी कमजोरी थी. आंद्रे के साथ के मेरे सेक्स रोम्प को कैमरा में क़ैद करने के बाद स्वीडन के पोर्न इंडस्ट्री में उसकी खूब कीमत लगी और देखते-देखते मैं काफी पैसा बनाने लगी...

'मैंने अपने मम्मी पापा को ये कहा कि मैं पेरिस जा रही हूँ और फिर लन्दन स्टडी के लिए. और वो मान गए. सबसे ज़्यादा मज़ा मुझे पेरिस की ओर्गिस में आता था. हर बार नए-नए लड़कों के जिस्म से खेलना मेरा शौक़ बन गया था. और फिर पैसे भी खूब मिलते थे. मगर जैसे-जैसे मेरी उम्र बीस के ऊपर जाने लगी पोर्न बाज़ार में मेरी कीमत कम होने लगी. अंग्रेजों के मुकाबले फ्रेंच ज़्यादा मज़ेदार हैं मस्ती के इस खेल में.'

मिशेल की बातों का मेरे दिमाग़ पर गहरा असर होता जा रहा था. उससे मैंने सवाल किया, "तुमने मुझे ही क्यों ड्रिंक के लिए चुना, जबकि यहाँ 'हार्प' में इतने गोरे मजमा लगाए हुए हैं?" मिशेल कहती है, "मुझे अपनी जैसी चमड़ी वालों पर ड्रिंक खरीदने का उतना एतबार नहीं रहा जितना की तुम्हारे जैसे एशियन पर. तुम एशियन, ब्लैक बालों वाले ज़्यादा ज़ेनेरस होते  हों और लड़कियों के मामले में बेहद संगीन. मैं अब खुद ड्रिंक कभी नहीं खरीदती. कोई भी पोर्न स्टार अपने वाल्लेट से ड्रिंक नहीं लेता. उसे आदत हो चली होती हैं मनचले लड़कों से हर चीज़ लेने की, उसमे ड्रिंक भी ज़रूरी चीज़ हैं." 

मिशेल ने यह कहकर  मुझे थोड़ा हैरत में डाल दिया कि गोरे लड़के एक पेनी भी किसी लड़की पर उडाना पसंद नहीं करते जब तक कि कोई महबूब साथ न हों. मिशेल ब्रिटिश लड़कियों को उतनी एरोटिक नहीं मानती जितनी वो अपने मुल्क स्वीडन या फ्रांस की हसीनाओं को मानती है.

लन्दन पब के इस खूबसूरत हाट में गोरी, काली और पीली लड़कियों की एक से एक दिलचस्प अफसाने 
हैं. लोगबाग यहाँ हर साल करीब 18 अरब पौंड का शराब और बीयर पी जाते हैं और क्लबिंग और गम्बलिंग में भी अरबों पौंड का जुआ खेलते हैं.  लड़कियां हमसफ़र होती हैं और हर लम्हे में नशा घोल रही होती हैं.

मिशेल की कहानी मेरे लिए अजूबा नहीं थी, मगर ये हादसा ज़रूर कुछ सबक सिखा गया. चलते चलते जब मिशेल को मैंने कहा की मेरा वतन हिंदुस्तान है तो वो खिलखिला के हँस पड़ी और बोली, "वाउ, हिंडुस्टान... दि लैंड ऑफ़ कामसूट्रा. यू गाइज़ वाच अ लॉट ऑफ़ पोर्न. आय नो. हाउ मेनी ऑफ़ यू आर ओवर अ बिलियन."

लन्दन और आसपास के शहरों के पब को देखकर एक एहसास यह होता हैं कि वाइन, व्हिस्की, बिअर और सिदर के अलावा हर पब का अपना ख़ास साइन बोर्ड हैं. ये साइन बोर्ड ब्रिटेन पब संस्कृति के हेरिटेज को बखूबी दर्शातें हैं. हेनरी ८ ने जब तक कैथोलिक चुर्च से बगावत नहीं की थी तब पब के साइन बोर्ड मजहबी सिम्बल ज्यादा होते थे मगर उसके बाद 'किंग'स हेड', 'कुईं'स हेड', 'शकेस्पारे', 'कूपर आर्म्स', 'टोबी कार्वेरी', 'रोज़ गार्डेन' और जितने भी रोमांटिक हो सकते हैं, होने लगे. कुछ पब के नाम 'दि क्रिकेटर', 'स्मगलर हंट' और 'हाइवे मैन' भी है.

मिशेल है तो स्वीडन की मगर उसने मुझे ब्रिटेन के मर्दों और लड़कियों की अजीब सी दास्ताँ से रूबरू कराया.


(फ्रेंक हुज़ूर लेखक और स्वतंत्र पत्रकार हैं. लन्दन में रह रहे हैं. सुप्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी  इमरान खान  पर लिखी उनकी किताब "इमरान वर्सेस इमरान : द अनटोल्ड स्टोरी" जल्दी ही प्रकाशित होनेवाली है.  उनके साथ frankhuzur@gmail.com  पर संपर्क किया जा सकता है.)

3 टिप्‍पणियां:

  1. When a girl goes bad--men go right after her........its a worth reading.....keep it up Frank

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  2. पूरा लेख पढ़ गया एक साँस में . शशि जी लंबा कमिंग अप चलाया अपना. हम जैसे लोगों के लिए यह एक नया अनुभव है. यह कल्पना करना भी असहज लगता है कि कोई ऐसे कहे - " आई एम् ए पोर्न स्टार ". अंत में भारत के लिए उसका यह कहना कि "चलते चलते जब मिशेल को मैंने कहा की मेरा वतन हिंदुस्तान है तो वो खिलखिला के हँस पड़ी और बोली, "वाउ, हिंडुस्टान... दि लैंड ऑफ़ कामसूट्रा. यू गाइज़ वाच अ लॉट ऑफ़ पोर्न. आय नो. हाउ मेनी ऑफ़ यू आर ओवर अ बिलियन." सबको अपने बाजार के बारे में पता होता है वह जानती है कि पोर्न के लिए बड़ा बाज़ार है भारत , तभी तो कहती है : वाउ, हिंडुस्टान... दि लैंड ऑफ़ कामसूट्रा. यू गाइज़ वाच अ लॉट ऑफ़ पोर्न. मिशेल का हर मसले पर खुलकर फ्रेंक हुज़ूर से बात करना कई बात हम जैसे पाठकों को हतप्रभ कर गया. एक नई दुनिया को फ्रैंक की नज़रों से देखना वाकई में अलग लगा . फ्रेंक को बधाई और शशि जी का शुक्रिया कि उनके सौजन्य से इस फीचर को पढ़ने का मौका मिला. उम्मीद करता हूँ फ्रेंक की लन्दन में अभी और भी बहुत कुछ पढ़ने को मिलेगा. मैं उस पब में एक दिन जरूर जाना चाहूँगा .'कैन यू बाई मी अ ड्रिंक? बेहद दिलचस्प .

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  3. फ्रैंक शुक्रिया आपका. आपने इतने सुलझे तरीके से पूरी बातचीत को रखा है कि लगता है जैसे मिशेल और फ्रेक की बातें मेरे सामने हो रही है. मिशेल की बातों के बारे में अभी सोंच रहा हूँ. उसके दर्द का भी एहसास है कि "पोर्न इंडस्ट्री में जब एक कमसिन हसीना 15 साल की होती हैं तब उसका रुतबा मर्लिन मुनरो जैसा होता हैं. जब वो पचीस साल की हो जाती हैं तो उसे बेकार और बूढी समझा जाने लगता हैं." आपके फीचर ने मेरी आज की नींद उड़ा दी. दो बार और पढ़ चुका हूँ. अभी भी सोंच रहा हूँ.. कई बिंदुओं पर. ऐसी स्टोरीज करना वैसे किसी चैलेंज से कम नहीं. वैसे ये चुनितियाँ ही रचनात्मकता को नई ऊँचाइयों पर ले जा जाता है. लन्दन डायरी की अगली किश्त जा अभी से इंतज़ार है.

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