रविवार, 9 जनवरी 2011

हिन्दुस्तान की सरकार सावधान! वर्ल्डबैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक हिन्दुस्तान आ रहे हैं!

रॉबर्ट ज़ोएलिक, वर्ल्ड बैंक के प्रमुख
हिन्दुस्तान की सरकार सावधान!  

कोई किसी के पास आता है तो अपनी ग़रज से आता है.  

वर्ल्ड बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक सोमवार यानि 10 जनवरी से अपनी चार दिवसीय यात्रा पर हिन्दुस्तान तसरीफ ला रहे हैं. ज़ोएलिक इस दौरान बुनियादे ढांचे के विकास और भारत के साथ परस्पर सहयोग को मज़बूत बनाने की कोशिशें करेंगे. इस दौरान वे बिहार की यात्रा करेंगे और वहां महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे कुछ स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों से भी मिलेंगे.

अपनी चार दिवसीय हिन्दुस्तान यात्रा पर निकलने से पहले वर्ल्ड बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक ने मक्खन लगाते हुए कहा है कि विश्व आर्थिक विकास के फ़लक पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी कहा है कि हिन्दुस्तान का आर्थिक विकास दुनिया को मंदी के दौर से उबरने में मदद कर रहा है.

विश्व अर्थव्यवस्था में हिन्दुस्तान की यह भूमिका घरेलू स्तर पर उसके हालातों और सफलताओं की तारीफ़ करते हुए रॉबर्ट ज़ोएलिक ने कहा, ''विकासशील अर्थव्यवस्थाएं मुश्किल के इस दौर में आर्थिक विकास की धूरी हैं. भारत की यह भूमिका उसकी आगे की रणनीति, पर्यावरण और विकास के तालमेल और सभी लोगों के लिए समान अवसर उपलब्ध कराने की क्षमता पर निर्भर करेगी.''

काबिलेग़ौर है कि हिन्दुस्तान अप्रैल 2012 से शुरु हो रही 12वीं पंचवर्षीय योजना के तहत भारी निवेश की रुपरेखा तैयार कर रहा है और इस प्रक्रिया में विश्व बैंक की अहम भूमिका है. अपनी हिन्दुस्तान यात्रा के दौरान ज़ोएलिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया से मिलेंगे.

हिन्दुस्तान की यात्रा से ऐन पहले भारतीय अर्थव्यवस्था की तारीफ़ में दिए गए विश्व बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक के इस बयान को तो आपने सुन लिया लेकिन बीते 18 दिसंबर 2010 को बीबीसी को दिए गए उनके बयान को भी सुन लीजिये!  उस दिन उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमीर देशों की संकटग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं को बेहतर स्थिति में लाने की कोशिशों से दुनियाभर के विकासशील देशों का नुकसान होगा. उन्होंने कहा था कि विकसित देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को संभालने की कोशिशों का असर विकासशील देशों को मिलने वाले अनुदानों पर पड़ेगा.

काबिलेग़ौर है कि विश्व बैंक प्रमुख ने बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बचाने की कोशिशों से विकासशील देशों को होने वाले नुकसान के बारे में चेताते हुए कहा था कि बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बचाने के लिए जिस तरह से पैसा दिया जा रहा है उससे विकासशील देशों को अपने खर्चों और ज़रूरतों के लिए बाज़ार से चंदा या अनुदान जुटा पाने में दिक्कतें आएंगीं. 

इस सिलसिले में उन्होंने सीधे तौर पर दो तरह के ख़तरों की ओर इशारा किया था- पहला यह कि, आर्थिक संकट के कारण दुनियाभर में उस पैसे की उपलब्धता में कमी आएगी जिसे अभी तक मानवीय आधार पर दिया जाता रहा है. यानी मानवीय आधार पर जो पैसा बड़े दानदाताओं की ओर से ग़रीब देशों को मिलता रहा है, उसमें कमी आएगी. और दूसरा यह कि दुनिया के कई देशों में उपजे बेरोज़गारी के संकट ने इस ख़तरे को और दोगुना कर दिया है. अच्छे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अब दान देने के लिए हाथ खुला रखने के बजाय रक्षात्मक मुद्रा में आ गए हैं.

बड़े आर्थिक पैकेजों पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए विश्व बैंक प्रमुख ने यह भी कहा था कि बाज़ारों की स्थिति सुधारने के लिए जिस तेज़ी से और जितनी बड़ी मात्रा में पैसा तेज़ी लाने के लिए डाला जा रहा है वो उन्हीं वजहों में परिणीत हो सकता है जिसके चलते आज की आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हुई है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार 2010-2011 में भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर 8.8 फ़ीसदी तक होगी. हिन्दुस्तान का आर्थिक विकास दुनिया को मंदी के दौर से उबरने में मदद करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है- यह वर्ल्ड बैंक और विश्विक आर्थिक मंदी से जूझ रही दुनिया की सभी अर्थव्यवस्थाएं भलीभांति जान रही हैं.  

स्पष्ट है कि अपनी चार दिवसीय हिन्दुस्तान यात्रा पर निकलने से पहले वर्ल्ड बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक का भारतीय अर्थव्यवस्था के कसीदे गढ़ने वाला बयान दोगलेबाज़ी के सिवा और कुछ नहीं. इसलिए हिन्दुस्तान की सरकार सावधान हो जाओ, क्योंकि वर्ल्ड बैंक के प्रमुख रॉबर्ट ज़ोएलिक सोमवार यानि 10 जनवरी से अपनी चार दिवसीय यात्रा पर हिन्दुस्तान तसरीफ ला रहे हैं.

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