बुधवार, 1 सितंबर 2010

जेकरे माय मरे ओकरे एक पत्तल भात नय

"पीपली लाइव से मिला मेहनताना इतना नहीं था कि घर पक्का करवा पाते."
- ओंकारदास मानिकपुरी ('पीपली लाइव' में
 नत्था की भूमिका निभाने वाला कलाकार)

 




"पीपली लाइव' के हीरो (नत्था) का घर आज भी कच्चा"   
इस शीर्षक से आज 31 अगस्त 2010 को दैनिक भास्कर, 
नई दिल्ली संस्करण में
सोनाली चक्रवर्ती की छह कॉलम में एक ख़बर छपी है.
ख़बर का पहला पैरा इस प्रकार है-
 

"बॉलीवुड स्टार आमिर खान की फिल्म 'पीपली लाइव' में
नत्था की भूमिका में छाप छोड़ने वाले ओंकारदास मानिकपुरी
कभी भिलाई की गलियों में सब्जी बेचते थे.
लेकिन आज वे अपने घर में नहीं रुक पा रहे
क्योंकि उनके घर पहुँचते ही प्रशंसकों की भीड़ जो घेर लेती है.
वे छिप कर अपने बहनोई के घर में रह रहे हैं.
उनका अपना घर आज भी कच्ची मिट्टी का बना है.
वे कहते हैं कि 'पीपली लाइव'से मिला मेहनताना इतना नहीं था की घर पक्का करवा पाते...."
 

'दैनिक  भास्कर' की रिपोर्टर सोनाली चक्रवर्ती भिलाई में
अपने बहनोई के घर में ठहरे नत्था से जब  बातचीत कर रही थीं
ठीक उसी दिन
'पीपली लाइव' फिल्म के प्रोड्यूशर आमिर खान
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को
नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर
'पीपली लाइव' फिल्म दिखा रहे थे.

(पता नहीं फिल्म की डायरेक्टर अनुषा रिजवी और को-डायरेक्टर महमूद फारूकी को प्रधानमंत्री आवास बुलाया गया था या नहीं)
खैर, जिस इलेक्ट्रोनिक मीडिया के खिलाफ़ 'पीपली लाइव' फिल्म बनी है
उसी का सच मानूं तो यह फिल्म हिट हुई है.
रिलीज़ होने के पहले ही हफ्ते में 600 प्रिंटों को बेचकर
इस फिल्म की लागत (100 मिलियन यानि 10 करोड़) निकल चुकी थी.
उसके बाद तीसरा हफ्ता बीतने वाला है. 

याद रहे, 'पीपली लाइव' रिलीज़ होने के पहले
फिल्म के बहुचर्चित गाने 'महंगाई डायन..."
के मेहनताने को लेकर भी विवाद हो चुका है.  

हमारे मगही में एक कहावत है- 
'जेकरे माय मरे ओकरे एक पत्तल भात नय'
.........................................................
मित्रो,  मेरे कहने का मतलब यह कतई नहीं कि
'पीपली लाइव' के हीरो नत्था को उचित मेनाताना नहीं मिला.
यह तो बॉलीवुड का इतिहास रहा है.
हाँ, आमिर खान साहब ने बॉलीवुड में
नवागंतुकों के शोषण की परम्परा का निर्वाह भर किया है.

उम्मीद की जानी चाहिए
की अगले 2-4 साल बाद
नत्था यानी ओंकारदास मानिकपुरी भाई की
मुंबई में कोठी नहीं तो फ़्लैट तो ज़रूर होगा,
क्योंकि कई फिल्मों के ऑफर उन्हें मिल रहे हैं.
उन्होंने ख़ुद इंटरव्यू में बताया है.

...और इस बात की क्या गारंटी की कल नत्था
(ओंकारदास मानिकपुरी) भी आमीर खान की तरह
बॉलीवुड में नवागंतुकों का शोषण नहीं करेगा.

हमारे बहुत सारे साथी
किसानों की खुदकुशी पर बने फिल्म 'पीपली लाइव' 
को देख कर गंड़थैयो हो रहे हैं.

भगवान, खुदा, वाहे गुरू, जीसस
कॉमर्शियल खेती के लोभ में फंस कर
खुदकुशी करनेवाले किसानों को सदबुद्धि दे 
और परम्परागत खेती करके 

बदहाली और फटेहाली में भी
ज़िन्दगी जी रहे या थेथरई कर रहे
किसानों को जीने की हिम्मत दे.
आमीन.
- शशिकांत 

    

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