बुधवार, 18 अगस्त 2010

आज 2 अक्टूबर है, बापू का जन्मदिन...!

आज 2 अक्टूबर है, बापू का जन्मदिन...!

30 जनवरी सन 1948
नव-स्वाधीन भारत का काला दिन
दक्षिणपंथी विचारधारा से
ताल्लुक रखने वाले
एक दिग्भ्रमित युवक  ने
(मैं उसका नाम नहीं लेना चाहता)
हमारे बापू को
हमसे छीन लिया था.

आज तक बापू को,
बापू के बारे में
(खिलाफ़ और पक्ष में)
बहुत कुछ पढ़ा, सुना
और कुछ फ़िल्में भी देखी

अभी-अभी
फेसबुक पर विचरते हुए मुझे
बापू के आख़िरी क्षण का
फोटो मिला है-

(उसके दाएं हाथ में है पिस्तौल
उंगली घोड़े पर
बहस कर रहा है बापू से
फिर गोलियां चलाएगा!
......................
हे राम!)

आप सब भी देख सकते हैं!


शुक्रिया.
- शशिकांत 

4 टिप्‍पणियां:

  1. अत्यंत महत्वपूर्ण और स्तब्ध करने वाला। लेकिन 'इस दिग्भ्रमित युवक' की शिनाख्त उसके नाम, धर्म, जाति और विचारों के आधार पर होना ज़रूरी है। गांधी की हत्या को तभी रोका जा सकेगा।

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  2. भाई,
    बिल्कुल सही कहा आपने. दुःख इस बात का है कि भाजपा, आरएसएस, शिवसेना, बजरंग दल के साथ-साथ इधर वाले भी रोज़-रोज़ बापू के विचारों की हत्या कर रहे हैं, पिछले 62 साल से लगातार. बापू की राह पर हम चल रहे होते तो न यहाँ आर्थिक उदारीकरण की नीति और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का बोलबाला होता और न उपभोक्तावाद का नंगा नृत्य. सादगी से जी रहे होते हम, कम से कम संसाधनों में. फिर पर्यावरण का संकट भी पैदा न होता. काश बापू के विचारों को मरने से बचा लें हम!!!

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  3. ek baat samajh nahi aayi! kisi ki shinakht karne ke liye uski jaati, dharm aur vicharo ko sabke saamne rakhna kyon zaruri hai?

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  4. शाश्तिकांत भाई. आपने जो बापू के हत्यारे की तस्वीर दिखाई है उसके लिए शुक्रिया

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