पागल भिखारी और बिसलेरी की बोतल

हर पागल भिखारी के पास होती है एक गठरी
उसमें होते हैं -
कुछ गंदे, फटे-पुराने कपड़े
सूखे बासी बैंगन
आलू
माचिस की खाली डिब्बियां और
बिसलेरी, अक्वागार्ड या किनले की कुछ खाली बोतलें।

पानी पीकर फेंकी बोतलें
बीच सड़क पर पड़ी देख
लपक कर उठा लेता है पागल भिखारी
और लगा लेता है अपने सीने से
ताकि रौंद दे उसे पीछे से रही कोई कार
अपने पहियों के नीचे।

बीच सड़क पर पड़ी बोतलें पहले रोती हैं
अपने इस हाल पे जार-जार
फ़िर सोचती हैं - अपनी आंखों के आंसू पोछ
कितना है सुकून इस पागल भिखारी के पास
इतना नहीं देती थी हमें कार
बहुराष्ट्रीय पानी बेचनेवाली कंपनियों का सरदार।

ग़लत थीं हम
नहीं पहचान पाईं उन्हें
मतलबी थे वे
सिर्फ़ पानी से था उन्हें सरोकार
इसीलिए फेंक दिया जब उन्होंने हमें कार के पार
पीछे से रही थी एक कार
नहीं होता यदि यह यह तैयार
बीच सड़क पर पड़ी होती हमारी लाश
बार-बार रौंदी जातीं हम उन्हीं कारों के पहियों के नीचे
जिनमें बैठे लोगों की बुझाती हैं हम प्यास।

माफ़ करना हमारे दोस्त!
भले खाली हैं हम लेकिन हैं आज से तुम्हारे साथ
मिलकर हम खोलेंगे उनकी पोल
मतलबी कारवालों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों की बजाएंगे ढोल।
(अप्रकाशित)

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